रविवार, 25 जनवरी 2026

मेजर जयपाल सिंह मलिक

आज  मेजर जयपाल सिंह मलिक का अवसान दिवस है। एक अभूतपूर्व क्रांतिकारी थे मेजर जयपाल सिंह । 1916 में पश्चिमी उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में शामली के निकट कुरमाली गाँव के एक जाट किसान परिवार में पैदा हुए थे मेजर जयपाल सिंह। आगरा के सेन्ट जाॅन काॅलेज से स्नातकोत्तर जयपाल सिंह ने बिना दहेज के अन्तर्जातीय विवाह किया और गाँव के पहले व्यक्ति थे जिन्होंनेपत्नी को पर्दा प्रथा से मुक्त रखा। अंग्रेजी हुकूमत की गुलामी, दमन और अत्याचार ने उनके भीतर देश की आजादी की चाहत को इतना तीव्र किया कि वे 1941 में भाड़े की औपनिवेशिक ब्रिटिश सेना में एक कमीशन प्राप्त अफसर बन गये , ताकि अंग्रेजी हुकूमत के उत्पीड़न के सबसे बड़े हथियार के भीतर रहकर लड़ा जा सके। उन्होंने सेना में भारतीय अफसरों के खिलाफ ब्रिटिश अफसरों का नस्ली भेदभाव और घ्रणा का भाव प्रत्यक्ष देखा, बैरकों मे भारतीय सैनिकों की दुरावस्था को देखा । राष्ट्रीय मुक्ति संग्राम के असर, साम्राज्य विरोधी भावनाएँ, मातृभूमि से प्रेम और औपनिवेशिक शासन से उपजी घ्रणा के चलते उन्होंने उन्होंने अन्य भारतीय अफसरों के साथ मिलकर " काउंसिल ऑफ एक्शन" नामक गुप्त संगठन बनाया। इस संगठन का उद्देश्य ब्रिटिश शासन को उखाड़ फैंकने में अंग्रेजों से लड़ने वाले क्रांतिकारियों को आर्थिक व हथियारबंद मदद पहुँचाना था। 1942 के "भारत छोड़ो आंदोलन"  के दौरान हजारों नौजवानों ने संघर्ष में हिस्सा लिया तब उनके गुप्त संगठन ने लड़ने वाले इन क्रांतिकारियों को 3000 से ज्यादा हथियार मुहैया कराये। जब 1946 में ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ नौसेना के विद्रोह का कांग्रेस ने विरोध किया तो उन्हें झटका लगा। उनके संगठन को इसी दौरान अंग्रेज सरकार का गुप्त दस्तावेज हासिल हुआ जिसका कोडनाम " ऑपरेशन असायलम" था। इसका मकसद राष्ट्रीय आंदोलन के नेताओं के नेताओं की हत्या करवाना था। मेजर जयपाल सिंह ने भारी खतरा लेते हुए यह जानकारी कांग्रेस और समाजवादियों को दी, लेकिन दोनों ने इसपर ध्यान नहीं दिया। सिर्फ कम्युनिस्ट पार्टी और रिवाॅल्यूशनरी काउंसिल ऑफ एक्शन ने इस दस्तावेज को प्रकाशित कर दिया। इस घटना के चलते अंग्रेजी हुकूमत के सामने उनका भेद उजागर हो गया। इसके चलते उन्हें ब्रिटिश औपनिवेशिक सेना से भागना पड़ा, वर्ना उन्हें कोर्ट मार्शल करके गोली से उड़ा दिया जाता।
अंततः मई 1947 में " काउंसिल ऑफ एक्शन " को उन्होंने भंग कर दिया । 15 अगस्त 1947 को भारत ब्रिटिश हुकूमत से आजाद हो गया। मेजर जयपाल सिंह का मानना था कि विदेशी शासकों का तख्ता पलटने की साजिश करना शर्म की बात नहीं थी, बल्कि गौरव की बात थी और यह उनका हक भी था। इसीलिए आजादी के बाद मेजर ने पं. जवाहरलाल नेहरू के नाम एक खुला पत्र प्रकाशित किया, जिसमें उन्होंने " काउंसिल ऑफ एक्शन" की गतिविधियों का विवरण दिया तथा अंग्रेजी हुकूमत द्वारा उनपर लगाये गये आरोपों का खंडन करने के लिये आत्मसमर्पण की पेशकश की। बाद में नेहरू जी के कार्यवाहक सचिव की सलाह पर मेजर ने 3 सितम्बर 1947 को दिल्ली में सेना अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया ।  लेकिन उन्हें ब्रिटिश हुकूमत के द्वारा लगाये गये आरोपों से दोषमुक्त करने के बजाय उन आरोपों में गिरफ्तार करके कलकत्ता के फोर्ट विलियम में कैद कर दिया गया। नवम्बर 1947 उन्होंने पुनः अपने ऊपर लगाये गये आरोपों का खण्डन करते हुए नेहरू को विस्तृत पत्र लिखा, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला।  यह था नये आजाद मुल्क के शासकों द्वारा मेजर जयपाल सिंह को देशभक्ति के बदले में दिया गया ईनाम! 
अंततः मेजर जयपाल सिंह 1 साल तक फोर्ट विलियम में कैद रहे और फिर उसकी दीवार फांदकर फरार हो गये। यहाँ से उनका भूमिगत जीवन लगभग लगभग 10 वर्षों तक चला। अपने भूमिगत जीवन में बंगाल में किसानों के संघर्ष, तेलंगाना में निजाम के शासन के खिलाफ हथियार बंद संघर्ष, मणिपुर में राजतंत्र के खिलाफ आदिवासियों के संघर्ष और पांडिचेरी में फ्रांसीसी शासकों के खिलाफ संघर्ष में मदद की। 
1956 में मेजर भूमिगत जीवन से बाहर आये तो मुजफ्फरनगर में हजारों लोगों ने उनका स्वागत किया । 1970 में उन्हें उन्हीं पुराने आरोपों में एक साल के लिये जेल में बंद रखा गया। 1975 में पुनः आपातकाल के समय रोहतक जेल में रखा गया। नवम्बर 1976 में वे रिहा हुए। 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर उनका स्मरण लाजिमी है।

रविवार, 4 जनवरी 2026

दिल्ली दंगे

2020 के दिल्ली दंगे, 53 की मौत 700 जख्मी  उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं 5 जनवरी 2026

सोमवार, 29 दिसंबर 2025

about MP

Dear Friends
Me and Manoj went to meet our MP on 23rd December after  the Indian Cultural Congress held at Cochin 
He is very attentive in this age .He asked me about AIPSN and BGVS.
I said him about our work and also how the PSM is facing difficulties in the present political situation of the country
I told him regarding the National Education Assembly 2025..He had the opinion that let the govt do whatever they plan through their policy but we have to make an alternate plan of action for the the Education of the children ।
He also suggested to do in two sector apart from Education  one is on climate change and Env and the other one is on Agriculture.
He had his keen interest to make one Archives of all the documents of both AIPSN and BGVS for that he wants a team of atleast 5 youth and he will help them to go it
This time , I observed him very positive 
He is dependent for his daily work with his care taker but his mind is not depended, He works daily from 10 am to 4pm with his assistant who came regularly ।.,In between he takes rest for 1 hour and then continues his work।He dictates  her and she types 
MP wrote 3 books during these period 
Everything is possible by MP , work and dreaming  for the people's of this country is the most priority task of MP।
It was and till now at age of I think 95  continues
Meeting MP is always very motivating , educational
We got it as usual during this time

जवाहर भवन