सरकार तथा एमडीयू प्रशासन का असंवेदनशील रवैया
यूनिवर्सिटी की नैक छीन जाने का जिम्मेदार कौन?
जवाब दो
दोस्तों
जैसा कि आप सभी जानते हो हमारी यूनिवर्सिटी देश व प्रदेश में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली यूनिवर्सिटी है। हमारी यूनिवर्सिटी के स्थापना से लेकर वर्तमान दौर तक यूनिवर्सिटी ने शिक्षण क्षेत्र के साथ-साथ राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय सत्र पर खेलों में भी देश का नाम उच्चा किया हैं। यूनिवर्सिटी देश दुनिया में भी प्रदेश के सर्वांगींण विकास और निर्माण में अहम भूमिका निभा रही है। लेकिन आज हमारे शिक्षण संस्थान के सामने सरकार तथा प्रशासन की असंवेदनशीलता के कारण यूनिवर्सिटी तथा छात्रों के सामने चुनौतियां आकर खड़ी हो गई है।
वर्तमान,
दोस्तों वर्तमान समय में देश व प्रदेश में भाजपा की डबल इंजन वाली सरकार सत्ता में है। जिसने अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की घोषणा की थी।अब तेजी से नई शिक्षा नीति को हमारे शिक्षण संस्थानों पर लागू करते हुए शिक्षा को निजीकरण,सांप्रदायिककरण व केंद्रीयकरण के रास्ते पर ढ़केला है। जिससे हमारी यूनिवर्सिटी भी अछूती नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू होने के बाद स्कूल,कॉलेजों व यूनिवर्सिटीज में पढ़ने वाले गरीब मेहनतकश मजदूर-किसान व मध्य वर्गीय परिवारों से आने वाले छात्रों के ऊपर शिक्षा के खर्च का नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। हमारी यूनिवर्सिटी में भी हर साल 10% के हिसाब से फ़ीस बढ़ने के साथ-साथ प्रदेश और देश के तमाम शिक्षण संस्थानों में फ़ीस बढ़ रही हैं तथा महंगे सेल्फ फाइनेंस कोर्स खुल रहे हैं। कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में प्रवेश कम और ड्रॉप आउट बढ़ा है। एनईपी-2020 के बाद हमारी यूनिवर्सिटी के साथ-साथ देश व प्रदेश के शिक्षण संस्थानों को मिलने वाले शिक्षा बजट में भाजपा सरकार भारी कटौती कर रही हैं। जिससे हम एनआईआरएफ रैंकिंग में लगातार पिछड़ रहे है। 2019-20 के सत्र के दौरान से ही एमडीयू यूनिवर्सिटी की रैंकिंग लगातार खाली पड़े शिक्षक व गैर-शिक्षक तथा शोध में लगातार पिछड़ रहे हैं। लेकिन इसके विपरीत म.द.वि. प्रशासन स्टेट लेवल यूनिवर्सिटीज कैटिगरी लिस्ट में एनआईआरएफ द्वारा दी गई 35वीं रैंक का ढोल हम छात्रों के आगे पीट रहा है, जबकि हम देश की प्रमुख 100 यूनिवर्सिटी से बाहर हुए हैं। जिसको नज़रअंदाज करते हुए प्रशासन कि ओर से वाइस चांसलर महोदय ने विश्वविद्यालय को राजनीति के अड्डे के रूप में रूपांतरित करते हुए एक राजनीतिक विचारधारा को बढ़ावा दिया। जिसकी सहायता से विश्वविद्यालय में कार्य तो प्रतिदिन हुए क्योंकि महोदय हमारे विश्वविद्यालय को कंक्रिट के जंगल में बदलना चाहते हैं और सरकार की छात्र विरोधी तेज़ी से लागू कर रहा हैं। इसी लालच के कारण यूनिवर्सिटी के गुणवतापूर्ण पक्ष पर ध्यान नही दे पाए, टीचर्स की भर्ती नहीं कर पाए जिससे टीचर्स-स्टूडेंट्स अनुपात बिगड़ गया जिसको हाल फिलहाल में हमारे डीन ऑफ अकैडमिक ने कबूला हैं और जिससे हम 100 प्रमुख यूनिवर्सिटी की लिस्ट से बाहर हुए और एन.ए.ए.सी ने हमारी यूनिवर्सिटी की ए+ ग्रेड की मान्यता छीन ली।
प्रशासन और वाइस चांसलर महोदय ने यूनिवर्सिटी के साथ-साथ यहाँ पढ़ रहे छात्रों और रिसर्च कर रहे स्कॉलर के साथ धोख़ा किया क्योंकि एन.ए.ए.सी. के अनुसार हमारी ग्रेड 27 मार्च 2024 को खत्म हो गयी थी। जिसको छिपा कर रखा गया और यूनिवर्सिटी साइट पर भ्रामक ग्रेड दिखायी जो कानूनी रूप से गलत हैं। अब कौंसिल से नोटिस जारी करते हुए ग्रेड को वापिस लेते हुए साईट से "ए+" हटाने और अवैध रूप से ग्रेड प्रयोग करने के खिलाफ़ कानूनी कार्यवाही करने के दिशा-निर्देश दे सकते हैं। कौंसिल से ग्रेड छीन जाने से यूनिवर्सिटी के डिस्टेंस एडुकेशन से पढ़ रहे छात्रों की डिग्री रद्द होने का डर सता रहा हैं। हज़ारों छात्रों को इस गैर-कानूनी कदम से नुकसान हैं।
यूनिवर्सिटी की छवि और छात्रों के साथ धोखे के लिए सरकार और प्रशासन दोनों जिम्मेवार हैं, क्योंकि भाजपा सरकार पिछले सालों से शिक्षक भर्तियां नहीं होने दे रही हैं जिसके कारण हज़ारों शिक्षक लगने योग्य युवा बेरोजगार घूम रहे हैं। तथा दूसरी ओर भाजपा सरकार यूजीसी से मिलने वाली ग्रांट को लोन के रूप में तथा ग्रांट बंद करने की चेतावनी देते हुए हमारे प्रदेश की सभी यूनिवर्सिटीज को अपना खर्चा खुद चलाएं जैसे नोटिस बार-बार प्रशासन को थाम आ चुकी है। जिसका विरोध यूनिवर्सिटीज के छात्रों संगठनों, शिक्षक व गैर-शिक्षक संघ के संगठनों द्वारा किया गया और मजबूरन सरकार को यह फैसला वापस लेना पड़ा।
इसलिए आज सरकार तथा प्रशासन के द्वारा यूनिवर्सिटी तथा वहां पर पढ़ रहे छात्रों के अधिकारों के ऊपर सीधा हमला है किया जा रहा हैं। जिसके अंदर हमारा यूनिवर्सिटी प्रशासन तथा वाइस चांसलर महोदय भाजपा सरकार की शय पर असंवेदनशील तथा तानाशाही पूर्ण रवैया अपनाते हुए यूनिवर्सिटी को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं। इसलिए हम हमारे छात्र संगठन एसएफआई की ओर से आह्वान करते हैं कि भाजपा सरकार तथा प्रशासन के इस असंवेदनशील तथा तानाशाही पूर्ण रवैया के खिलाफ एकजुट होकर यूनिवर्सिटी को बर्बाद करने वाली व्यवस्था तथा सरकार की छात्र तथा शिक्षण संस्थान विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष को तेज करें।
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया, रोहतक
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